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आधा टिकट भाई साहब यह मेरा पूरा पर्स देख लीजिएगा। इसमें अब कुछ नहीं बचा है। इसमें ₹100 थे जो मैंने आप को दे दिए यह बोलते हुए उस गरीब बहन ने TC के हाथ में अपना पर्स दे दिया। शायद उसमें दो-चार ₹5 की चिल्लर और बची थी। लेकिन TC अड़ा हुआ था। मुझे ₹250 पेनल्टी के और ₹20 टिकट के अर्थात ₹270 चाहिए अन्यथा रतलाम में मैं तुम्हे पुलिस थाने में बंद करवा दूंगा। तुमने इस बच्चे का टिकट नहीं लिया है और इसकी उम्र 5 वर्ष से अधिक है। वह बात कर ही रहा था कि उसके दो साथी और आ गए और उन्होंने उस गरीब महिला को धमकाना चालू कर दिया । इतने में अगला स्टेशन आ गया । उन तीनों TC को लगा कि अब यहां से और कुछ मिलने की उम्मीद नहीं है ,इसलिए वे उस गरीब महिला के ₹100 लेकर उतर गये। उनके जाने के बाद उस महिला की हालत बहुत ही दयनीय दिखाई देने लगी। वह अपने ही दांतों से अपनी ही उंगलियां चबा रही थी। बीच-बीच में अपनी उंगलियों से आंखों में आया पानी भी साफ कर रही थी। मैं कुछ दूरी पर बैठा था मैंने अपने पड़ोसी को सो रुपए दिए और कहा वह यह सो रूपये उस बहन तक पहुंचा दो। उसने सो रुपए उस बहन तक पहुंचाए, लेकिन पहले तो उसने लेने से मना कर दिया। तब कोई नेकदिल इंसान बीच में आकर बोला ले लो बहन, कोई बात नहीं कोई किसी को नहीं देता है अल्लाह ने इंसान को नेक बुद्धि दी है कि वह तुम्हें सो रुपए दे रहा है और तुम यह समझो कि वह तुम्हें नहीं दे रहा है वह छोटी बालिका को दे रहा है ऐसी समझा-बुझाकर उसके पर्स में वह सो रुपए का नोट रख दिया। कुछ देर पश्चात पास में बैठी एक और बहन ने अपने पर्स में से ₹10 निकाले और उसने उस छोटी बिटिया के हाथ में रखे और बोला आप मना ना कीजिएगा । अब रतलाम आने वाला था और उस बहन को जावरा तक जाना था उसके पास एक ही अपना टिकट था और उस बिटिया का टिकट उसने नहीं लिया था जिसके कारण TC पैनल्टी मांग रहा था अब TC ₹100 लेकर चला गया और इसके पास एक ही टिकट था। तब मैंने बोला अब आप जावरा तक का आधा टिकट और ले लीजिएगा । और अगर आप ना ला सकते हो तो मैं ला कर दे देता हूं । तभी एक सज्जन उठे उन्होंने बोला भाई साहब आप क्यों तकलीफ उठाते हो आपके पास सामान भी है मैं खाली हाथ हूं मेरे पास कोई सामान नहीं है इसलिए यह नेक काम मुझे ही कर दे दीजिए। यह व्रतांत आज का ही है और इसको लिखने का मकसद एक ही है जब भी अवसर मिले हमें किसी की सहायता करनी चाहिए और अगर एक हाथ मदद के लिए उठता है तो हजार हाथ और भी उठते हैं । मुझे इस बात का सुकून रहेगा कि आज मैने किसी का दुःख शेयर किया।
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