रवि को बचपन से ही अपने दादाजी के पुराने सामान में दिलचस्पी थी। दादाजी की मौत के बाद घर का पुराना कमरा कई सालों से बंद पड़ा था।
एक दिन सफाई करते समय रवि को एक लकड़ी का छोटा-सा डिब्बा मिला।
डिब्बे के अंदर एक पुरानी घड़ी रखी थी।
घड़ी की सुइयाँ 12 बजकर 7 मिनट पर रुकी हुई थीं।
रवि ने घड़ी को साफ किया और उसमें नई बैटरी डाल दी।
लेकिन घड़ी नहीं चली।
रवि ने उसे वापस मेज पर रख दिया।
उसी रात अचानक उसके कमरे से आवाज़ आई—
टिक... टिक... टिक...
रवि की नींद खुल गई।
उसने देखा कि वही पुरानी घड़ी चल रही थी।
लेकिन अजीब बात यह थी कि घड़ी उल्टी दिशा में चल रही थी।
रवि घबराकर घड़ी के पास गया। तभी उसके पीछे से कुछ गिरने की आवाज़ आई।
वह मुड़ा।
जमीन पर एक छोटा-सा कागज़ पड़ा था।
उस पर दादाजी की लिखावट में सिर्फ एक वाक्य था—
“जहाँ समय रुकता है, वहीं से मेरा राज़ शुरू होता है।”
रवि को कुछ समझ नहीं आया।
अगली सुबह वह दादाजी के पुराने कमरे में गया। उसने पूरी दीवार ध्यान से देखी।
अचानक उसकी नजर एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी।
तस्वीर के नीचे छोटे अक्षरों में लिखा था—
12:07
रवि ने तस्वीर दीवार से हटाई।
पीछे एक छोटा-सा छेद था।
उसने हाथ अंदर डाला तो उसे एक पुरानी डायरी मिली।
डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—
“रवि, अगर तुम्हें यह डायरी मिली है, तो इसका मतलब है कि घड़ी फिर से चल चुकी है।”
रवि का चेहरा डर से सफेद पड़ गया।
उसने अगला पन्ना खोला।
उसमें लिखा था—
“आज रात ठीक 12:07 बजे घर के पीछे वाले पुराने बरगद के पेड़ के पास जाना। लेकिन याद रखना... वहाँ तुम्हें जो दिखाई देगा, उस पर भरोसा मत करना।”
रवि पूरी रात सोचता रहा कि दादाजी ने आखिर ऐसा क्यों लिखा था।
रात के 12 बजने में कुछ ही मिनट बाकी थे।
जैसे ही घड़ी ने 12:07 बजाया...
घर की सारी लाइटें अचानक बंद हो गईं।
और उसी समय बाहर बरगद के पेड़ के पास से किसी ने धीमी आवाज़ में कहा—
“रवि... आखिर तुम आ ही गए।”
रवि डरते हुए खिड़की के पास गया।
बरगद के नीचे कोई खड़ा था।
लेकिन वह चेहरा अंधेरे में दिखाई नहीं दे रहा था।
रवि ने दरवाजा खोला और धीरे-धीरे पेड़ की तरफ बढ़ने लगा।
तभी उसकी जेब में रखी दादाजी की घड़ी जोर-जोर से चलने लगी।
टिक... टिक... टिक...
और अचानक घड़ी की सुइयाँ 12:07 से पीछे जाकर 11:59 पर रुक गईं।
रवि ने सामने देखा।
वहाँ अब कोई नहीं था।
सिर्फ जमीन पर एक पुरानी चाबी पड़ी थी।
चाबी के साथ एक कागज़ था—
“अगर सच जानना है, तो कल रात पुराने कुएँ के पास आना।”
रवि ने चाबी उठाई।
लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि वह चाबी उसके दादाजी के सबसे बड़े राज़ का दरवाज़ा खोलने वाली थी...
Episode 1 समाप्त
Episode 2 में: रवि पुराने कुएँ के पास पहुँचता है, जहाँ उसे एक ऐसा रहस्य मिलता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी...

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